शेयर बाजार में सफलता का रहस्य – ट्रेडिंग मनोविज्ञान पर महारत हासिल करें!

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Trading Psychology – ट्रेडिंग मनोविज्ञान

Trading Psychology in Hindi : प्राइस एक्शन (Price Action) क्या होता है? चार्ट पर कैंडल्स (Candles) कैसे बनती है? और उनके पीछे बायर्स और सेलर्स का क्या माइंडसेट या फिर साइकोलॉजी (Trading Psychology) होती है? इन के बारे में आज हम इस पोस्ट में डिटेल में जानेंगे। सबसे पहले प्राइस एक्शन किसे कहते हैं यह जानते हैं और उसकी साइकोलॉजी को समझते है और उसके बाद हम कैंडल की साइकोलॉजी को समझेंगे। 

प्राइस एक्शन (Price Action) साइकोलॉजी

  • यह निफ्टी 50 का 2 फरवरी 2024 का 5 मिनट टाइम फ्रेम का चार्ट है। यहां मार्केट 21800 लेवल पर ओपन होता है और एक स्ट्रांग ग्रीन बुलिश कैंडल के साथ ऊपर बढ़ता है।
Price action nifty chart
  • उसके बाद अगले दो घंटों तक क़ीमत 21950 लेवल से रेजिस्टेंस की मार को झेलते हुए एक ही रेंज में ट्रेड करती है। लेकिन 11:00 बजे के बाद इस रेंज को ब्रेक करके क़ीमत ऊपर निकल जाती है। क़ीमत एक स्ट्रांग मूवमेंट के बाद यहां एक बेस बनाती है और ब्रेकआउट के बाद फिर से अपना पुराना मोमेंटम कंटिन्यू करती है। यहां क़ीमत एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट तक मूवमेंट करती है। 
  • जब भी क़ीमत को किसी डायरेक्शन में आगे बढ़ना होता है, तो क़ीमत कभी भी एक सीधी रेखा में आगे नहीं बढ़ती। क़ीमत को आगे बढ़ाने के लिए मार्केट में बायर्स और सेलर्स का होना जरूरी होता है। इसीलिए क़ीमत आगे बढ़ते हुए हायर लोज और लोअर हाइज का फॉर्मेशन बनाती है। जिससे अलग-अलग लेवल्स पर बायर्स और सेलर्स मार्केट में एंट्री और एग्जिट करते रहते हैं। क़ीमत के इसी मूवमेंट या फिर एक्शन को ट्रेडिंग की भाषा में प्राइज एक्शन कहते हैं।

प्राइस एक्शन (Price Action) साइकोलॉजी

  • अब कैंडल्स कैसे बनती है? और उनके पीछे क्या साइकोलॉजी होती है? यहाँ निफ्टी 50 का 5 फरवरी का 5 मिनट टाइम फ्रेम का चार्ट है। 
nifty chart price action 4
  • यहां मार्केट 21900 लेवल पर ओपन होता है और Price Action बनाते हुए 21960  इस लेवल से रेजिस्टेंस फेस करता है। अगर आप चार्ट को ध्यानपूर्वक देखेंगे, तो यहां  क़ीमत 21950 से लेकर 21960 इस लेवल से बार-बार रेजिस्टेंस फेस कर रही है। इसका मतलब जब भी  क़ीमत इस एरिया में आती है, सेलर फिर से फ्रेश सेलिंग स्टार्ट करते हैं। और क़ीमत को नीचे पुश करते हैं।
  • डे लोज को अगर हम कनेक्ट करते हुए एक ट्रेंड लाइन ड्रॉ करते हैं। तो जब भी क़ीमत इस ट्रेंड लाइन को टच करती है, वैसे ही बायर्स मार्केट में एंट्री करते हैं और क़ीमत को ऊपर ले जाते हैं। यहां सेलर्स के स्टॉप लॉस ऊपर की तरफ इस एरिया में है और ज्यादातर बायर्स के स्टॉप लॉस इस सपोर्ट लेवल के नीचे प्लेस है। 
nifty chart price action 2
  • इसका मतलब यह दो लेवल्स अभी मार्केट में साइकोलॉजिकली सबसे इंपॉर्टेंट है। क्योंकि जैसे ही मार्केट इन लेवल्स को तोड़ने की कोशिश करेगा, वैसे ही बायर्स या फिर सेलर्स की साइकोलॉजी डिस्टर्ब होगी और वो पैनिक में आकर अपनी पोजीशंस एग्जिट करने लगेंगे। 
  • लास्ट टाइम जब बायर्स  क़ीमत को ऊपर ले जाने की कोशिश करते हैं, तो जैसे-जैसे  क़ीमत रेजिस्टेंस लेवल के पास आती है वैसे ही बायर्स की संख्या कम होने से कैंडल्स की साइज छोटी होती जाती है। जिससे क़ीमत रिसेंट स्विंग हाई को ब्रेक नहीं कर पाती। इसका मतलब क़ीमत को ऊपर ले जाने का यह बायर्स का आखिरी अटेंप्ट था।
  • लो बाइंग प्रेशर को देखकर सेलर्स  क़ीमत को फिर से नीचे पुश करते हैं। जिससे एक स्ट्रांग रेड कैंडल ट्रेंड लाइन को ब्रेक करते हुए नीचे क्लोज हो जाती है। ट्रेंड लाइन को टूटता हुए देखकर यहां कुछ बायर्स डर जाते हैं और ट्रेड से एग्जिट करने लगते हैं।
  • तो कुछ न्यू ट्रेडर इस सपोर्ट लाइन को देखकर फिर से लोअर लेवल्स पर बाइंग करते हैं। जिससे क़ीमत एक बार फिर से ऊपर बढ़ती है, लेकिन सेलिंग प्रेशर ज्यादा होने के कारण क़ीमत ज्यादा टाइम तक इस लेवल को होल्ड नहीं कर पाती और सीधे नीचे चली जाती है।
  • यहां चार्ट पर नजर डाले तो हैमर टाइप कैंडल पर बिग इंस्टीट्यूशनल सेलर्स मार्केट में आखिरी बार एंट्री करते हैं। जिससे क़ीमत बहुत तेजी से बड़ी-बड़ी रेड कैंडल्स बनाते हुए नीचे गिर जाती है।
nifty chart price action
  • यहां इस ब्रेकडाउन के पीछे मार्केट की Trading Psychology आपको समझनी होगी। मॉर्निंग में 10 बजे से लेकर, इस ब्रेकडाउन पॉइंट तक अगर आप ध्यान से क़ीमत मूवमेंट को देखेंगे, तो यहां जब भी  क़ीमत ऊपर की तरफ बढ़ती है तो छोटी ग्रीन कैंडल्स बनती है। लेकिन जब भी  क़ीमत नीचे आती है तब बड़ी-बड़ी रेड कैंडल्स बनाकर नीचे आती है। 

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  • इसका मतलब मार्केट में सेलर्स बायर्स के मुकाबले एक्टिवली सेलिंग कर रहे हैं और वह क़ीमत को रेजिस्टेंस लेवल के नीचे रखने में ज्यादा इंटरेस्टेड है। कोई भी बिग इंस्टीट्यूशनल सेलर्स अपने सेल ऑर्डर्स किसी एक लेवल पर एक ही वक्त नहीं लगा सकते। क्योंकि वह बहुत बड़ी क्वांटिटी में ट्रेड करते हैं। इसलिए उन्हें अपने सेलिंग ऑर्डर्स को एग्जीक्यूट करने के लिए मार्केट में लिक्विडिटी चाहिए होती है। 
  • इसी वजह से मार्केट में लिक्विडिटी बनाने के लिए। क़ीमत को बार-बार ऊपर की तरफ पुश किया जाता है जिससे ज्यादा से ज्यादा रिटेल ट्रेडर रेजिस्टेंस ब्रेकआउट के उम्मीद में बाइंग करते हैं और इन बिग इंस्टीट्यूशनल सेलर्स के सेल ऑर्डर धीरे-धीरे एग्जीक्यूट होते हैं। 
  • जैसे ही रिटेल ट्रेडर्स का बाइंग इंटरेस्ट कम होता है। वैसे ही यह बड़े सेलर्स ऊपर से सेलिंग स्टार्ट करते हैं और क़ीमत को गिरा देते हैं मार्केट में ऑपरेटर्स द्वारा जानबूझकर क़ीमत को बार-बार इस रेजिस्टेंस लेवल के पास लाया गया है और वह चाहते हैं कि रिटेल ट्रेडर्स को ऐसा लगे कि अभी इस रेजिस्टेंस का ब्रेकआउट जरूर होने वाला है। जिससे कुछ रिटेल ट्रेडर इंपेशेंट होकर लालच में आते हैं और लेवल के ब्रेकआउट के पहले ही अपनी ट्रेड एंट्रीज करना चालू कर देते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर हम यहां एंट्री नहीं करेंगे। 
  • तो यह ट्रेड अपॉर्चुनिटी उनके हाथ से निकल जाएगी। जो जो ट्रेडर इस जोन में एंट्री करते हैं। उनके मन में फियर ऑफ मिसिंग आउट इसका मतलब फोमो की भावना उत्पन्न होती है और वह इस माइंडसेट को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। इसी तरह बड़े ट्रेडर्स रिटेल ट्रेडर्स के माइंडसेट से खेलते हैं और उन्हें लालच दिखाकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। मार्केट में ट्रेडिंग करते समय आपको इन्हीं इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स की चाल को समझना है। जिसे हम स्मार्ट मनी कांसेप्ट कहते हैं। तभी आप प्रॉफिटेबल ट्रेडर बन सकते हैं। इस चार्ट में बने प्राइज एक्शन को देखकर आपको कुछ इंपॉर्टेंट पॉइंट्स हमेशा ध्यान में रखने होंगे।

ट्रेडिंग में अनुशासन है जरूरी, ट्रेडिंग मनोविज्ञान ही सफलता की कुंजी है!

ध्यान रखने की कुछ महत्वपूर्ण बाते:

  • जब भी मार्केट एक कंसोलिडेशन जोन में ट्रेड करता है, या फिर एक रेंज में ट्रेड करता है उस समय रेंज के ब्रेकआउट से पहले ट्रेड एंट्री नहीं करनी चाहिए।
  • आपको क्या लगता है इससे ज्यादा चार्ट पर क्या दिखता है, इस बेसिस पर ट्रेड एंट्री करनी चाहिए।
  • किसी भी एक अकेले कैंडल को देखकर ट्रेंड के अपोजिट ट्रेड एंट्री ना करें। यहां इस अकेले ग्रीन बुलिश कैंडल को देखकर अगर आप लॉन्ग ट्रेड लेने की कोशिश करते हैं। तो आपका लॉस होने के चांसेस ज्यादा है।
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  • जब भी किसी ट्रेंड लाइन सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस इन जैसे किसी इंपॉर्टेंट साइकोलॉजिकल लेवल का ब्रेक होता है। तो जब तक एक स्ट्रांग ब्रेकआउट कैंडल से उस लेवल का ब्रेक नहीं होता है और चार्ट पर कंटिन्यूएशन कैंडल नहीं बनती, तब तक अपने पूरी क्वांटिटी से ट्रेड एंट्री नहीं करनी चाहिए।
  • मार्केट में प्राइज एक्शन का एनालिसिस करते हुए कुछ कैंडल्स को देखकर बाय और सेल का डिसीजन नहीं करना चाहिए। कोई भी डिसीजन लेने से पहले मार्केट का ओवरऑल मेजर ट्रेंड क्या है, यह देखना बहुत जरूरी है।  तभी आप सही ट्रेड एंट्री कर सकेंगे। 

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आशा करता हु की Trading Psychology के इस लेख में ट्रेडिंग के मनोविज्ञान के बारे में आपको आवश्यक जानकारी मिली होती। इससे आपको ट्रेडिंग को समझने में जरूर मदद होगी, अगर फिर भी आपके कोई सवाल हो, तो आप मुझे अपने सवाल मेल कर सकते है।

Email : fiinpodcast@gmail.com

ट्रेडिंग मनोविज्ञान (Trading Psychology) के संबंध में अधिक जानने के लिए यहाँ पढ़े : ट्रेडिंग मनोविज्ञान

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